ईमानदारी

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  • एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्‍योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है। कुलुस्सियों ३:९
  • बुराई के बदले किसी से बुराई न करो। जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्‍ता किया करो। रोमियों १२:१७
  • क्‍योंकि जो बातें केवल प्रभु ही के निकट नहीं, परन्‍तु मनुष्यों के निकट भी भली हैं हम उन की चिन्‍ता करते हैं। २ कुरिन्थियों ८:२१
  • छल के तराजू से यहोवा को घृणा आती है, परन्तु वह पूरे बटखरे से प्रसन्न होता है। ...सीधे लोग अपनी खराई से अगुवाई पाते हैं, परन्तु विश्वासघाती अपने कपट से विनाश होते हैं। नीतिवचन ११:१, ३
  • बुरा मनुष्य अपने दुर्वचनों के कारण फन्दे में फंसता है, परन्तु धर्मी संकट से निकास पाता है। ... जो सच बोलता है, वह धर्म प्रगट करता है, परन्तु जो झूठी साझी देता, वह छल प्रगट करता है। नीतिवचन १२:१३, १७
  • जो अपने अपराध छिपा रखता है, उसका कार्य सफल नहीं होता, परन्तु जो उनको मान लेता और छोड़ भी देता है, उस पर दया की जायेगी। नीतिवचन २८:१३
  • इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के साम्हने अपने अपने पापों को मान लो, और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिस से चंगे हो जाओ। धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है। याकूब ५:१६
  • परन्‍तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्‍तु सत्य को प्रगट करके, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं। २ कुरिन्थियों ४:२